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11 को गृहस्थों के लिए व 12 अगस्त को वैष्णवों का श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाना श्रेष्ठ

11 को गृहस्थों के लिए व 12 अगस्त को वैष्णवों का श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाना श्रेष्ठ

 

11 को गृहस्थों के लिए व 12 अगस्त को वैष्णवों का श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाना श्रेष्ठ
Chakia (चकिया): भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इस माह में भगवान विष्णु की खास पूजा करनी चाहिए। इस दिन पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग है। 


ज्योतिषाचार्य अभिषेक कुमार दूबे का कहना है कि इस बार जन्माष्टमी पर कृतिका नक्षत्र रहेगा, उसके बाद रोहिणी नक्षत्र रहेगा, जो 13 अगस्त तक रहेगा। पूजा का शुभ समय रात 12 बजकर 5 मिनट से लेकर 12 बजकर 47 मिनट तक है।

जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक कर पंचामृत अर्पित करना चाहिए।माखन मिश्री का भोग लगाएं। 


हर बार की तरह इस बार भी जन्माष्टमी दो दिन मनाई जा रही है। 11 और 12 अगस्त दोनों दिन जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है। 11 अगस्त मंगलवार को स्मार्थ गृहस्थों के लिए एवं वैष्णों मतानुयायी श्रीकृष्णजन्माष्टमी का व्रत 12 अगस्त बुधवार को करेंगे


इस वर्ष दोनों दिन ही अर्धरात्रि में रोहिणी नक्षत्र का संयोग ना होने से अर्धरात्रि व्यापिनी अष्टमी तिथि को ही प्रधानता दी जाएगी । तदनुसार 11 अगस्त शनिवार को होगा । 


दो दिन की होती है जन्माष्टमी


भारत में लोग अलग–अलग तरह से जन्माष्टमी मानते हैं। वर्तमान समय में जन्माष्टमी को दो दिन मनाया जाता है, पहले दिन दैनिक दिनचर्या वाले लोग जन्माष्टमी मानते हैं।अगले दिन रोहिणी नक्षत्र में साधू-संत जन्माष्टमी मानते हैं। मंदिरों में साधू–संत झूम-झूम कर कृष्ण की अराधना करते हैं। इस दिन साधुओं का जमावड़ा मंदिरों में सहज है|


चकिया से अमितेश कुमार रवि की रिपोर्ट




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